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Reliance Infrastructure Share Price: लगातार अपर सर्किट के बावजूद 52 वीक हाई से अभी भी बड़ी गिरावट, क्या है आगे की रणनीति

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अनिल अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर (Reliance Infrastructure) एक बार फिर शेयर बाजार में सुर्खियों में आ गई है। पिछले कई दिनों की भारी गिरावट के बाद इस हफ्ते शेयर ने तगड़ी रिकवरी दिखाई है। लगातार दो ट्रेडिंग सेशन में Reliance Infrastructure Share Price पर अपर सर्किट लगा, जिसके बाद लंबे समय से दबाव में रहे निवेशकों को कुछ राहत मिली है। लेकिन क्या यह रिकवरी टिक सकेगी? और क्या ये शेयर वाकई अंडरवैल्यूड है या जोखिम अभी भी बड़ा है? आइए पूरे विश्लेषण को विस्तार से समझते हैं।

दो दिनों में 5% के अपर सर्किट से लौटी तेजी

गुरुवार के कारोबार में Reliance Infrastructure Share Price बीएसई पर 5% बढ़कर 165.85 रुपये पर बंद हुआ। इससे पहले पिछले सत्र में भी यही तेज उछाल देखने को मिला था। लगातार छह दिन गिरावट के बाद यह रिकवरी निवेशकों के मनोबल के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। हालांकि इस तेजी के बावजूद शेयर पिछले एक महीने में करीब 27% टूट चुका है, जो बड़ी कमजोरी की ओर इशारा करता है।

52 वीक हाई से 60% नीचे कारोबार

रिलायंस इन्फ्रा के शेयर ने साल में 423.40 रुपये का 52-वीक हाई बनाया था, लेकिन मौजूदा Reliance Infrastructure Share Price इस स्तर से करीब 60% नीचे चल रहा है। यानी जिन्होंने उच्च स्तर पर एंट्री ली थी, उनका निवेश अभी भी भारी नुकसान में है। यह गिरावट बताती है कि शेयर में लंबे समय से दबाव और अनिश्चितता बनी हुई है। वहीं इसका 52-वीक लो 149.16 रुपये है, और शेयर फिलहाल इसके थोड़ा ही ऊपर ट्रेड कर रहा है।

मार्केट कैप और वैल्यूएशन बेहद कम

कंपनी का मौजूदा मार्केट कैप लगभग 6,454 करोड़ रुपये है। इतनी बड़ी इंफ्रा कंपनी का वैल्यूएशन आकर्षक माना जा रहा है।
सबसे खास बात यह है कि Reliance Infrastructure Share Price अभी बेहद लो वैल्यूएशन पर ट्रेड हो रहा है। शेयर का P/E रेश्यो सिर्फ 2.11 है और P/B रेश्यो 0.26 है। ये आंकड़े बताने के लिए काफी हैं कि शेयर बेहद कम कीमत पर उपलब्ध है। कम P/E और कम P/B कई बार अंडरवैल्यूएशन का संकेत देते हैं, लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस में कर्ज, प्रोजेक्ट डिले और कैशफ्लो की चुनौतियाँ भी लगातार दबाव बनाती हैं।

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होल्डिंग पैटर्न में बड़ा फेरबदल, FII ने निकाला पैसा

सितंबर 2025 की तिमाही में शेयरहोल्डिंग पैटर्न में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले,प्रमोटर्स ने अपनी 19.05% हिस्सेदारी बरकरार रखी है, जो स्थिरता का संकेत देती है।
घरेलू म्यूचुअल फंड्स ने अपनी भागीदारी 0.29% से बढ़ाकर 0.35% की है, जो भले मामूली हो, लेकिन भरोसा बढ़ने का संकेत माना जा रहा है।

दूसरी ओर, विदेशी निवेशकों (FII/FPI) ने अपनी होल्डिंग 10.26% से घटाकर 7.07% कर दी है। करीब 3% की यह भारी बिकवाली मार्केट में चिंता का विषय बनी हुई है।

एफआईआई की हिस्सेदारी का गिरना आमतौर पर यह दिखाता है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेशक किसी कंपनी में निकट भविष्य की चुनौतियाँ देख रहे हैं। यही कारण है कि Reliance Infrastructure Share Price में गिरावट लगातार बनी हुई थी।

क्या ये शेयर वाकई अंडरवैल्यूड है

कम वैल्यूएशन और धीमी कीमत से यह लग सकता है कि Reliance Infrastructure Share Price अंडरवैल्यूड है। लेकिन हर बार कम वैल्यूएशन का मतलब अवसर हो, ऐसा जरूरी नहीं है। कई कंपनियाँ लंबे समय तक लो वैल्यूएशन पर इसलिए रहती हैं क्योंकि बिजनेस में रियल ग्रोथ नहीं हो रही होती या उन पर कर्ज का बोझ भारी होता है।

रिलायंस इन्फ्रा के मामले में भी कंपनी पर पुराने कर्ज, परियोजनाओं की धीमी गति और लीगल/फाइनेंशियल जटिलताओं का असर देखा जा चुका है। इसलिए किसी भी निवेशक को सिर्फ लो वैल्यूएशन देखकर इसमें निवेश नहीं करना चाहिए।

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क्या मौजूदा रिकवरी टिकाऊ है

दो दिनों की तेजी जरूरी नहीं कि ट्रेंड बदल देने वाला संकेत हो। शेयर में एक महीने की भारी गिरावट अभी भी ज्यादा है और रिकवरी बेहद सीमित दिखाई देती है। यह संभव है कि Reliance Infrastructure Share Price में शॉर्ट-कवरिंग या टेक्निकल बाउंस के कारण तेजी आई हो।
लॉन्ग-टर्म निवेशक तभी एंट्री पर विचार कर सकते हैं जब कंपनी के फंडामेंटल में स्पष्ट सुधार दिखे और एफआईआई की सेलिंग स्थिर हो जाए।

लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए क्या रणनीति होनी चाहिए

लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए इस समय सबसे महत्वपूर्ण है कि वे कंपनी के तिमाही नतीजों, कर्ज की स्थिति और नए प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर नजर रखें। यदि कंपनी अपने डेट को कम करने और कैशफ्लो बेहतर करने में सफल रहती है, तब Reliance Infrastructure Share Price में मजबूत रिवर्सल देखने को मिल सकता है परिस्थितियाँ अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं हैं, इसलिए जल्दबाज़ी में खरीदी करना जोखिम भरा हो सकता है।

निष्कर्ष

हालांकि Reliance Infrastructure Share Price में लगातार दो दिनों की बढ़त दिखाई दी है, लेकिन यह कहना जल्दबाजी होगी कि गिरावट का दौर खत्म हो चुका है। शेयर अभी भी 52-वीक हाई से बहुत नीचे है और एफआईआई की बिकवाली चिंता बढ़ा रही है। वैल्यूएशन आकर्षक जरूर है, लेकिन इंफ्रा सेक्टर की चुनौतियाँ और कंपनी की वित्तीय स्थिति को देखते हुए निवेशक सावधानी बरतें।
जो भी निवेशक इसमें एंट्री लेने की सोच रहे हैं, उन्हें कंपनी की आगामी तिमाही रिपोर्ट और बिजनेस अपडेट का इंतजार करना समझदारी भरा कदम होगा।

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